ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना से बद्रीनाथ तक का 11 घंटे का सफर महज 4 घंटे में पूरा होगा

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ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन की परियोजना न केवल बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले यात्रियों के लिए बल्कि गढ़वाल मंडल के लोगों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बल्कि यह रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से भविष्य में सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे लाइन के विस्तार की संभावनाओं को पूरा किया जा सकता है। बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट बद्रीनाथ केदारनाथ यात्रा के स्वरूप को बदलने में मदद करेगा. इस रेलवे लाइन के बनने से बद्रीनाथ और केदारनाथ आने वाले यात्री कम समय और कम किराए में यात्रा कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना को वर्ष 2025 तक जल्द से जल्द पूरा करने का लक्ष्य है। यह रेलवे लाइन राज्य के गढ़वाल मंडल में स्थित 5 जिलों देहरादून, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और चमोली को जोड़ेगी।

 करीब 4 घंटे की दूरी घटकर हो जाएगी 2 घंटे की आधी

इस रेलवे लाइन की मदद से यात्री मात्र 2 घंटे में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक पहुंच सकेंगे। नतीजतन यात्रियों को कर्णप्रयाग और बद्रीनाथ पहुंचने में काफी कम समय लगेगा। साथ ही कर्णप्रयाग से बद्रीनाथ तक की करीब 4 घंटे की दूरी इस रेलवे परियोजना के बाद घटकर आधी (2 घंटे) हो जाएगी। बता दें कि अब ऋषिकेश से बद्रीनाथ जाने में 11 घंटे का समय लगता है।ट्रैफिक जाम आदि की स्थिति में समय 11 घंटे से अधिक हो जाता है लेकिन इस रेलवे परियोजना के आने के बाद से ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक पहुंचना संभव होगा। चार घंटे।

17 सुरंगों के माध्यम से 105 किमी लंबी रेलवे होगी लाइन

उत्तराखंड में बनने वाली रेल परियोजना की प्रस्तावित लागत करीब 16216 करोड़ रुपए बताई जा रही है। 125 किमी की दूरी पर, इस रेलवे परियोजना में 17 सुरंगों के माध्यम से 105 किमी लंबी रेलवे लाइन होगी। इस रेलवे परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इस परियोजना पर देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग (14.08 किमी) का निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, देवप्रयाग (सऊद) से जनसु तक रेलवे टनल डबल ट्यूब टनल का निर्माण किया जाएगा

 

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