इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा 10 जून को, जानिए इस ग्रहण के बारे में पूरी जानकारी

ज्ञान धार्मिक

इस साल का सबसे बड़ा ग्रहण में से एक ग्रहण 10 जून को लगने जा रहा है जो भी एक सूर्य ग्रहण होगा धार्मिक दृष्टि से ज्यादातर रहे शुभ नहीं माने जाते हैं। तथा इसमें हर वर्ष किस ने किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हर एक व्यक्तियों को अपनी राशियों के अनुसार लेकिन इस खगोलीय घटना का दीदार करने के लिए लाखों लोग बहुत यादव से नजर आते हैं तथा वह बेसब्री से इंतजार करते हैं इससे भाव मुक्त दृश्य को देखने का है। आपको बता दें कि ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा सूर्य को इस तरह से ढकेगा जिससे सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशमान रह जायेगा और मध्य हिस्सा पूरी चरह से ढक जाएगा। इस स्थिति में सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह नजर आयेगा। जानिए इस अद्भुत सूर्य ग्रहण से जुड़ी खास बातें…

कब और कहां लगेगा सूर्य ग्रहण? सूर्य ग्रहण 10 जून को दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा जिसकी समाप्ति शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगी। ये ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, लेकिन उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग में, उत्तरी कनाडा, यूरोप और एशिया में, ग्रीनलैंड और रुस के अधिकांश हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। कनाडा, ग्रीनलैंड तथा रूस में वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। वहीं उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्सों, यूरोप और उत्तर एशिया में आंशिक सूर्य ग्रहण दृश्य होगा।

148 साल बाद अद्भुत संयोग: तिथि काल गणना के अनुसार 148 साल बदा यह मौका आया है कि शनि जयंती के दिन सूर्यग्रहण लगेगा। 10 जून को सूर्य ग्रहण का अद्भुत योग भी बनेगा। हालांकि चंद्रग्रहण की ही तरह भारत में यह सूर्य़ ग्रहण दिखायी नहीं देगा। बताते चलें कि सूर्य देव और शनि पिता-पुत्र हैं। पौराणिक मान्यता है कि दोनों में मतभेद और अलगाव रहे हैं।

क्या रहेगा सूतक काल? भारत में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। क्योंकि ज्योतिष अनुसार उसी ग्रहण का सूतक काल मान्य होता है जो ग्रहण अपने यहां दृष्टिगोचर हो। भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। 

वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या है? वलयाकार सूर्य ग्रहण को रिंग ऑफ फायर के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि इस दौरान आसमान में सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह चमकता हुआ नजर आता है। हालांकि ये नजारा कुछ ही समय का होता है। ये ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य के पूरे भाग को अपनी छाया से नहीं ढक पाता इस स्थिति में सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशित रहता है। यानी जब चंद्र सूर्य के सामने आते हुए उसे इस प्रकार से ढकता है कि सूर्य बीच में से तो ढका हुआ प्रतीत हो लेकिन उसके किनारों पर रोशनी का एक छल्ला या अंगूठी बनती हुई दिखाई दे तो इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

सूर्य ग्रहण के दौरान वर्जित कार्य:
-इस दौरान किसी भी नए व मांगलिक कार्य का शुभारंभ नहीं किया जाता है।
-ग्रहण काल के समय भोजन पकाना और खाना दोनों ही मना होता है।
-ग्रहण काल में भगवान की मूर्ति छूना और पूजा करना भी मना होता है।
-तुलसी के पौधे को छूने की मनाही होती है।
-इस दौरान दाँतों की सफ़ाई, बालों में कंघी, शौच करना, नए वस्त्र पहनना, वाहन चलाना आदि कार्यों को भी न करने की सलाह दी जाती है।
-ग्रहण के समय सोने से भी बचना चाहिए।

सूर्य ग्रहण लगने की वैज्ञानिक वजह: सूर्य हमारे सौरमंडल के केंद्र में स्थित है और सभी ग्रह इसके चारों और चक्कर काटते हैं। सूर्य का चक्कर काटने वाले ग्रहों के उपग्रह भी होते हैं। जो अपने ग्रहों के चक्कर काटते हैं। जैसे पृथ्वी का उपग्रह चंद्रमा है। इसी प्रक्रिया के दौरान जब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है जिससे सूर्य की रोशनी को वो आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है तो इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते हैं।

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