ईश्वर और अल्लाह हकीकत में है भी या सिर्फ है फसाना ,जानिए असल सच

ज्ञान धार्मिक

लेकिन यदि हम कुरान और बाइबिल की शिक्षा और कहानियों को ध्यान से पढ़ें तो उनमे काफी समानता मिलती है .इस बात को सभी मानते हैं कि बाइबिल कुरान से बहुत पुरानी है.

बाइबिल के दो भाग हैं , पुराना नियम और नया नियम .पुराने नियम को यहूदी “तनख תנך” कहते हैं ,इसमे 39 किताबें शामिल हैं .पुराना नियम करीब 535 ई .पू में सकलित हो चूका था .और नए नियम में 27 किताबें शामिल हैं ,जो सन 66 संकलित हो चुकी थी .और यूरोप के अलावा अरब में भी प्रचलित थीं .इस्लाम के अनुसार पुराने नियम में तौरेत और जबूर आती हैं ,और नए नियम को इंजील कहा जाता है .अरब के लोग इन किताबों से अच्छी तरह परिचित थे .कुरान की पहली आयत सन 610 में उतरी थी ,और मुहम्मद की मौत सन 632 तक कुरान की आयतें उतरती ( बनती )रहीं .जिनका सन 644 में खलीफा उस्मान बिन अफ्फान ने संकलन किया था .

आज की कुरान में कोई मौलिकता (Originality ) नहीं दिखाई देती है ,सब बाइबिल से ली गयी हैं .यद्यपि किसी भाषा के टेक्स्ट को दूसरी भाषा में ज्यों का त्यों अनुवाद करना असंभव होता है ,लेकिन उनके भावार्थ में समानता दिखाई मिल जाती है . यही बात कुरान और बाइबिल के बारे में लागु होती है .दौनों के विचारों में असाधारण समानता से सिद्ध होता है ,कि मुहम्मद ने कुरान की रचना बाइबिल से प्रेरणा लेकर की थी .सिफ कुछ थोड़ी सी बातें ऐसी थी ,जो मुहम्मद ,और अरब लोगों से सम्बंधित है .यहाँ पर कुछ उदहारण दिए जा रहे हैं ,जिन से पता चलता है कुरान ऊपर से नहीं उतरी ,बल्कि नीचे ही बैठकर बाइबिल को देखकर और समझ कर लिखी गई है.

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