उत्तराखंड में सामने आई दहेज लोभियों की शर्मनाक हरकत..मार डाला बहू के पेट में पल रही नन्हीं जान को

खबरे शहर

उत्तराखंड के यूएसनगर स्थित रुद्रपुर से मानवता को श”र्मसा’र कर देने वाली ख’ब’र सामने आ रही है। हम सब जानते ही हैं कि महिलाओं पर उ”त्पी”ड़”न के केस लगातार राज्य में बढ़ते जा रहे हैं। उत्तराखंड में लगातार इं”सा”नि’य’त श”र्म”सा’र हो रही है। समाज का एक बड़ा हिस्सा आज भी द”हे”ज’ की कु”प्र”था को मान रहा है। द’हे’ज’ का’नू’नी’ रू’प’ से जु”र्म” है मगर इस क”ड़े” का”नू”न के बाव’जू’द भी लोग धड़”ल्ले” से द’हे’ज’ ले रहे हैं और अपने घर में आने वाली ब’हु”ओं’ को द’हे’ज’ के लिए प्रता”ड़ि”त कर रहे हैं। उत्तराखंड में द”हे”ज” की प’रं’प’रा अभी चल रही है और लोग द”हे’ज’ के च’क्क’र’ में का’नू’न” को अपने हाथ में ले रहे हैं और इंसा”नि’य’त’ की हदों को श”र्म”सा”र कर रहे हैं। रुद्रपुर में द”हे”ज के लो’भि”यों’ ने अपनी द’हे’ज’ की ला”ल’सा’ में बहु के पे”ट” में पल रहे अपने आने वा”ले वा”रि”स” को ही जा”न से ”मा”र”’ दिया। जी हां, यह श’र्म’ना”क घ”ट”ना उत्त”रा”खं”ड” के रुद्रपुर में हुई है। सोचिये आखिर उस बेकसूर मां पर क्या बीती होगी जिसने अपने ”ग”’र्भ” में पल रहे अपने शि”शु को हमेशा-हमेशा के ”खो” दिया है। दुनिया में आने से पहले ही ”शि”शु” ने दु’नि’या” से वि”दा” ले ली। आ’खि’र’ कितने ”क्रू”र होंगे वे लोग जि’न्हों’ने’ शि”शु” को मा”त्र” चं’द पै”सों ‘के लिए ”मौ”त” के ”घा”ट” उतार दिया।

जब पी”ड़ि”ता” को पु”लि”स” की शि’का”य’त’ ”के बाद भी न्या”य” नहीं मिला तो उसने एसएसपी से ”न्या”’य की गु”हा”र” लगाई। कोतवाली पु”लिस ने एसए”स”पी के आ’दे’श’ पर अ’ज’न्मे’ ब’च्चे की मां और ‘पी’ड़ि”ता’ के प”ति” समे”त ससुराल के 11 लोगों के खि”ला”फ” ‘मु’कद’मा” ‘द”’र्ज क”र जां”च” शुरू कर दी है। हिम्मत की बात यह है कि महिला ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ आ’वा’ज’ ‘उ’ठा’ई और उसने का”नू”न का सहारा लिया। चलिए अब आपको पूरी घ”ट”ना” से अ’व”ग’त’ कराते हैं। ”पी”’ड़ि”’ता की पह”चा”न” ‘दीपा के रूप में हुई है। दीपा ने एस”ए”स”पी रुद्रपुर को दिए प्रा’र्थ’ना पत्र में लिखा है कि उसकी शादी डेढ़ वर्ष पूर्व राजीव से हुई थी। राजीव रेशमबाड़ी निवासी है। शादी में दीपा के माता-पिता ने अपनी क्षमता अनुसार उस”को” द”हे”ज” ‘दे”क’र’ ‘भेजा’ ‘था मगर उसके ससुराल पक्ष वाले और ”द”हे’ज’ ”की मां”ग कर रहे थे। वे दीपा के मायके वालों से उनको 1 ला”ख” रुपए देने की मां”ग कर रहे थे।

अं”त”रि”म रूप से दीपा ग”र्भ”व”ती हो गई, लेकिन उक”सा”वे ने उसे नहीं रोका और उसके माता-पिता ने उसे प”रे”शा”न किया और उसे बौद्धिक और वास्तविक रूप से प”शा”न किया। ग”र्भ”व”ती होने के बाद भी, वह उसके साथ मा”र”पी”ट करता था और वि”द्रो”ह’ कर”ता था। ल”ड़ा”ई के दौरान एक दिन, उसने दीपा को अचा”न’क पे”ट” में ला”त” मा”री”, जि”स”से पे”ट” में ही उसका ब”च्चा” गु”ज”र” ग”या’। इसके साथ ही, इस घ”ट”ना के बाद, दीपा ने अ”ति”रि”क्त” रूप से अपने अ”ज”न्मे” नौ”ज’वान के उत्था”न के लिए और अकेले ही ब”र्ब”र लोगों की आ”लोच’ना करने के लिए भाग्य का प्रदर्शन किया और वह का”नू”न पर नि”र्भ”र हो गई। दीपा ने राम”पु”रा की पो”स्ट” पर इ”स बा”रे में स”वा”ल कि’या, फिर भी कोई स”ला”ह नहीं हुई। अ”ति”रं”’जि”त, उसने अपनी कहानी ए”स”ए”स”पी को चि”त्रि”त की, जिसके बाद पु’लि”स ने उसके बे’ह’त’र आधे राजीव, उसके रिश्तेदार और हर एक अ’न्य परिवार के खि’ला’फ साक्ष्य के एक निकाय को सूचीबद्ध किया और प्र”क्रि”या”एं शु”रू’ कीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.