पहली बार होंगी युद्धपोत पर तैनात दो महिलाएं भारतीय नौसेना के इतिहास से जुड़ने वाला है एक नया अध्याय

राष्टिय समाज

आज के समय में महिलाएं किसी भी कार्य में पुरुषों से कम नहीं है। चाहे वह राजनीति हो तकनीकी हो या फिर युद्ध भूमि में हो। ऐसा ही कारनामा होने जा रहा है जब जंगी जहाज पर अपनी दो जांबाज महिलाएं अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। जिनका शुभ नाम है कुमुदिनी त्यागी और रीति सिंह इन्होंने पूरे भारतवर्ष में अपने परिवार का नाम गर्व से ऊंचा किया है। उन्हें नौसेना ने ‘ऑब्‍जर्वर्स’ (एयरबोर्न टैक्‍टीशियंस) में चुना है। इससे पहले तक महिलाएं कभी भी इतनी बड़ी भागीदारी देते हुए नहीं दिखाई दी थी। यह कारनामा रचने वाली या दोनों पहली महिलाएं।

इससे पहले तक महिलाओं की भागीदारी सिर्फ़ फिक्‍स्‍ड विंग एयरक्राफ्ट तक ही सीमित थी, जो समुद्र तटों के पास ही टेकऑफ और लैंड करते थे। इन दोनों के अगर पोस्ट की बात की जाए तो कुमुदिनी त्‍यागी लेफ्टिनेंट पर अपनी सेवाएँ दे रही हैं, तो वहीं रीति सिंह सब लेफ्टिनेंट हैं।

इन दोनों को इस तैनाती से पहले एक कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ा, जिसे उन्होंने अपने मेहनत के दम पर समय रहते बखूबी पूरा किया। अब ये उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों महिला अधिकारी नौसेना के नए MH-60 R हेलीकॉप्टर पर उड़ान भरेंगी जो फिलहाल ऑर्डर में है।

इससे पहले भी साल 2016 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। वर्तमान समय में भारतीय नौसेना में कुल 1875 महिलाकर्मी हैं और इनमें से 10 फाइटर पायलट हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार “चीफ स्‍टाफ ऑफिसर रियर एडमिरल ऐंटनी जॉर्ज ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है, जब महिलाएँ हेलिकॉप्‍टर ऑपरेशंस में ट्रेन्‍ड होकर जंगी जहाजों पर तैनात होंगी।” यह पूरे भारत देश के लिए गर्व की बात होगी।

हालांकि इससे पहले भी भारतीय नौसेना में कई महिला अधिकारी हैं। लेकिन अब तक उन्हें युद्धपोतों पर तैनात नहीं किया गया था, जैसे क्रू क्वार्टर में प्राइवेसी की कमी और जेंडर के हिसाब से अलग बाथरूम की सुविधा का न होना इत्यादि की समस्या। लेकिन अब इसमें काफ़ी बदलाव हो रहा है।

इसके पहले वायुसेना ने राफेल लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए एक महिला पायलट को चुनकर पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। इस तरह से महिलाओं को नई-नई जिम्मेदारियाँ देना एक मज़बूत और सशक्त भारत को दर्शाता है। निश्चित रूप से यह भारतीय नौसेना के इतिहास में एक ऐतिहासिक क़दम है, जिससे हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा।

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